स्वस्थ जीवनशैली

स्वास्थ्य अर्थात ऊर्जा

हम क्या खाते हैं, साथ-साथ हमारा संग कैसा है, कौन से चित्रों को हम अपने मन में ग्रहण करते हैं, समय जिसका हम सम्मान करते हैं और लोग जिनका हम आदर करते हैं, जब इन बातों के लिए सजग रहते हैं तब ही हम स्वास्थ्य का आनन्द ले सकते हैं। यह कालजयी सलाह हमारे लोक साहित्य में सदियों से चली आ रही है परन्तु इस आधुनिक समय में हममें से बहुत सारे लोग इस बुद्धिमत्तापूर्ण बात को खारिज कर दिया है।

उत्सुकतावश हमारा समय के लिए भूखा समाज जिसके पास समय की कमी है, उसने स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने में कोताही बर्ती है। जहाँ हम फास्ट फूड और चीनी से भरे हुए स्‍नैक्स खाते हैं, कम सोते हैं, कम व्यायाम करते हैं, कम बातें करते हैं और ज्यादा चिन्ता करते हैं अपने बन्धनों, बच्चों की पढ़ाई और अपनी बचत के बारे में। हममें से ज्यादातर लोग उत्तेजनावश या तेज गति से दौड़ रहे हैं।

हम जानते हैं इस गतिमान जीवन का बहुत जल्द अन्त की ओर ले जायेगा। हम बहुत भाग्यशाली हैं अगर हम किसी व्यायामशाला की सदस्यता को लेते हैं और अपने स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं या योग प्राणायाम या ध्यानयोग का अभ्यास करते हैं। लेकिन हममे से बहुत से लोग थक-हार कर सोफा में टेलीवीजन के सामने धस जाते हैं, और टीवी के नशे में चले जाते हैं।

लेकिन यहाँ हमारे पास विकल्प है

  • ऊर्जा से भरा हुआ स्वस्थ खाद्यान्न
  • परिवार और मित्रों के साथ आमने-सामने बिताया हुआ गुणवत्तापूर्ण समय
  • पार्क के किसी कोने में शान्ति से बैठकर या फिर ‍किसी बगीचे में सूरज की हल्की धूप और खुली हवा का आनन्द लेते हुए स्वयं के साथ बिताया हुआ वास्तविक समय
  • हम मानव हैं मानव मशीन नहीं। जब हम अपनी व्यस्त होना और हांसिल करने की लत को कर्म में लाते हैं और उसके बाद एक जगह आरामदायक स्थिति में बैठकर केवल भरपूर श्वांस लेते हैं तब हम अपने शरीर को स्वस्थ होने का और पुन: सन्तुलन में लाने का समय देते हैं।

अपने अस्त-व्यस्‍त जीवन से एक कदम पीछे हटकर अपने आपको अलग कर खुद को साक्षी होकर देखना यह एक बहुत बड़ी चुनौती होकर रह गई है। खुद को साक्षी होकर देखने का यह समय हमें परिस्थितियों में अधिक उलझना और अधिक भावनाप्रधान बनने से थोड़े से अन्तर पर रखने की समझ देता है। सारे दिन के अनुभवों का निचोड़ निकालते हुए याद रखें कि अपने जीवन के आप ही कर्ता-धर्ता हो।

समझदारीपूर्ण जीवन पद्धति

जब आप अपनी ऊर्जा को समझते हैं तब आप मास्टर बनते हैं। जो भोजन आप खाते हो उसके प्रति सजग हो जायें, कितना खा रहे हैं और कितनी गति से खा रहे हैं। मांस हारमोन्स से भरा हुआ होता है जिसकी शरीर को आवश्यकता नहीं होती है। हमारी कल्पना से भी बाहर शराब के दुष्परिणाम हैं। धीमा आहार ही एक परियाय है। वनस्पति आधारित भोजन से हमारे शरीर के अवयवों पर कम भार पड़ता है और हम अपनी जीवन शक्ति को बचा सकते हैं।

समझदारीपूर्ण सोच रखें, समझकर खायें और समझदार बनें, आपका मन और शरीर आपको गहरी नींद की बख्सीस देगा और आपकी एकाग्रता को बढ़ायेगा। वास्तव में आपको अपने अधिकतर समय का कैसे इस्तेमाल करना है इसका नियोजन करने की आवश्यकता है।

समय आपको चला रहा है या आप समय को चला रहे हैं?

हम समय के निर्माता हैं, हम अपने समय को नियोजित करने के लिए डायरी और फोन रिमाइन्डर का इस्तेमाल करते हैं। उसी तरह से हम अपनी आत्मा को पोषित करने के लिए भी आराम से समय निकाल सकते हैं। तो क्यों ना हम वो समय निकालें। जब आप एकान्त में अपने आन्तरिक स्व के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताते हैं तो ऊर्जा के नियम के अनुसार आप दूसरों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने की समझ रखते हैं। आप अच्छा सुनेंगे, सही टिप्पणियाँ लेंगे और सही निर्णय निर्देशित करेंगे जिससे समय की बचत होगी। और आप देखेंगे कि इसके परिणाम आपको उत्साहित करेंगे।

 

मजे़ करो, शान्त रहो

आपकी बेहतर नियोजन के बाद भी अगर परिस्थितियाँ चिढ़ उत्पन्न करने वाली बनी रहती हैं तो कम से कम आप शान्त तो रह सकते हैं और उबलते हुए क्रोध के फटने से व्यर्थ होने वाली अपनी ऊर्जा को बचा सकते हैं। जब आपके समय और शक्ति का अपव्यय होता है तब वो आपको लम्बे समय तक याद रहता है।

तो समय के प्रति सजग हो जायें और अपनी बिखरी हुई शक्ति को उचित योग्य दिशा देने का नया रास्ता खोज निकालें। स्क्वैश खेलिए, पुरानी चीजों से निजात पाइये, अपने बाथरूम को ठीक कीजिए, अपने पेट को घुमाने ले जाइये, शान्त रहिये। जो भी कुछ आपके आस-पास हो रहा है उस स्थिति में शान्त रहिये।

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