योगाभ्यास कहाँ कर सकते है ?

जीवन पहले से ही विविधताओं से भरा हुआ है, बहुत सारी गतिविधियाँ और जिम्मेदारियाँ होती हैं। ऐसे समय में हम राजयोग अभ्यास को कहां और किस समय कर सकते हैं, यही तो राजयोग की सुन्दरता है कि इसे कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है।

घर में

राजयोग अभ्यास के लिए खास रूम अथवा जगह की आवश्यकता नहीं है। कोई भी एकान्त और शान्त स्थान या आरामदायक कुर्सी भी चल सकती है। अपनी आन्तरिक गहराई को समझने के लिए लगातार और नियमित समय निश्चित करें। कुछ ही समय में आपको ऐसी जगह मिलेगी जिसकी तरफ आप आकर्षित होने लगेंगे जहाँ पर आपने अपनी शान्ति की स्थिति से और आत्म चिन्तन के अभ्यास से शान्ति का वातावरण बनाया होगा। ऐसी उस छोटी सी जगह पर आप स्वयं जाना पसन्द करेंगे।

आपके कार्य स्थल पर

जब भी आप कामकाज करते हैं केवल एक रचनात्म‍क विचार ही राजयोग अभ्यास के लिए एक अच्छी जगह प्राप्त करा सकता है। शान्ति से अपने फोन को अपने कान पर लगाकर कुछ क्षणों के लिए अपने भीतर की शान्ति को सुनने का अभ्यास करें, बजाए कि फोन की आवाज सुनें। या फिर आप बरामदें में अपनी फाइल को हाथ में उठाकर ले जाते हुए कुछ मिनटों के लिए अपनी टेबल से अलग शान्ति का अनुभव कर सकते हैं। आपके सहकर्मियों को पता भी नहीं चलेगा कि आप मेडिटेशन कर रहे हैं लेकिन हो सकता है कि वो आपकी स्थिरतम शान्ति को महसूस करें।

सफर के दौरान

एक जगह से दूसरी जगह जाने में जो समय आपको लगता है, चाहे पैदल, बस या ट्रेन का सफर हो, इसे हम इस्तेमाल कर सकते हैं, अपनी भीतरी निशब्दता और मौन की यात्रा कर सकते हैं। आंखे खुली रखकर राजयोग अभ्यास की पद्धति इस भीतरी यात्रा को सम्भव और व्यावहारिक बना देता है।

अन्दर या बाहर?

सारा विश्व सम्भवत: आपको उस विशिष्ठ जगह को चुनने के लिए आगे आता है। जहाँ पर आप अपने आपसे परमात्मा के साथ जुड़ सकते हो। सूरज की रोशनी से भरा हुआ समुद्री किनारा हो या सुपर मार्केट की लम्बी लाइन हो या शान्ति से भरा हुआ नदी का किनारा या फिर किसी डेन्टिस्ट का प्रतिक्षा कक्ष हो, शहर के चौराहे में लगी हुई कोई बेंच हो या फिर घास का मैदान, कहीं भी हम योग का अभ्यास कर सकते हैं। कोई भी जगह शान्ति और स्थिरता का अभ्यास करने के लिए उपयुक्त है। अपने पसन्द की कोई भी शान्त जगह चुन सकते हैं।

भीड़ में भी शान्ति का अनुभव

जैसे ही आप अपने भीतर में शान्त जगह को बनाना सीख लेते हैं आपको महसूस होगा कि आप कभी भी उस जगह में जा सकते हैं। जब आपके आस-पास बहुत सारे लोग हों या आपके आस-पास की दुनिया में बहुत सारी आवाजें हों या फिर चुनौतियाँ हो तो भी आप आराम से विश्व की उस शान्ततम जगह में चले जा सकते हैं - आत्मा की शान्त स्थिति में लौट आयें।

अकेले में या किसी के साथ

योग का सर्वश्रेष्ठ और सुन्दर अनुभव तब हो सकता है जब आप अकेले हों, उस एक परमात्मा के साथ हों। कुछ ऐसी जगह और समय हो सकता है जब आप किसी के साथ बैठकर मेडिटेशन करना चाहे। विश्व भर में हर जगह पर ब्रह्माकुमारीज़ के सेन्टर्स हैं जहाँ पर ऐसे स्थान बने हुए हैं वहाँ कभी भी आप जाकर शान्ति के उन क्षणों को अनुभव कर सकते हैं। कुछ जगहों पर इन्हें इनर स्पेश कहा जाता है।

विश्व भर में ऐसा भी कुछ समय निश्चित किया गया है जब एक जैसी पसन्दी के लोग आपस में मिलकर मेडिटेशन करना चाहते हैं। इस समझ के साथ कि सभी मिलजुल कर एक ही समय पर किये गये सकारात्मक विचारों को साझा करने से उनके अन्दर की शक्तियों में बढ़ोत्तरी हो सकती हैं और शुभ भावनायें और कामनायें औरों तक पहुंचाई जा सकती हैं।

सम्पूर्ण विश्व के लिए एक घण्टा योग

1978 में विश्व भर में हर जगह पर एक घण्टे तक शान्ति से बैठकर योगाभ्यास के माध्यम से सकारात्मक प्रकम्पन्न फैलाने की यह प्रथा शुरू हुई जो महीने के हर तीसरे रविवार को एक घण्टा योग के द्वारा चल रही है। इसक लक्ष्य है कि हम अपने सकारात्मक प्रकम्पनों का दूसरों के साथ साझा करें और विश्व को और अपने महत्वपूर्ण ग्रह के लोगों को शान्ति और प्रेम का दान करें। अगर हम याद रखें कि यह विश्व हमारा अपना घर है तो हम सभी मिलजुलकर बेहतर विश्व निर्माण के लिए एक आशा की किरण फैला सकते हैं।

रिट्रीट – शान्ति देने वाले स्थान

पूरे दिन में शान्ति और सुकून का वातावरण बनाने के अलावा कभी-कभी हम अपनी नियमित दिनचर्या से समय निकालकर आध्यात्मिक रिट्रीट के स्थान पर जाना पसन्द कर सकते हैं।

किसी फार्म में रिट्रीट के लिए विशेष जाना यह अपने आन्तरिक स्व के साथ जुड़ने की ओर रखा गया पहला कदम हो सकता है। बाह्य रूप से कुछ चीजों से अपने आपको अलग करने के बारे में हम सोच सकते हैं। विशेष समय निकालकर बाहरी तौर पर भौतिक रूप से कुछ परिवर्तन किया जा सकता है। लेकिन वास्तविक रिट्रीट का, क्या जिसमें हम अपने भीतर की गहराईयों तक उतर जायें? जब हम अपने ऊपर काम करते हैं तब हम अपनी भीतर की शान्त जगह पर लौटते हैं जहाँ हम अपने वास्तविक स्व के साथ पुन: जुड़ सकते हैं। यह हमारा आध्यात्मिक स्व है जो हमारे अन्तर में है। वो हिस्सा जो कभी भी बदलता नहीं है। 

स्वयं के लिए विशेष समय निकालना यह मेडिटेशन के सफर की प्रक्रिया है। मेडिटेशन हमें अपने आन्तरिक स्व के सन्तुलन की तरफ लौटाता है, जहाँ हमारे विचार, भावनायें, ऊर्जा और समय मूल्यों की दिशा में इस्तेमाल होते हैं और बहुत ही मूल्यवान बनते हैं। अपने वास्तविक पहचान की सही समझ और मन की जागृति की स्थिति पर सबकुछ निर्भर करता है। इस स्थान पर हम अपने जीवन के अत्यधिक सकारात्मक अनुभवों के दरवाजे को खोलने की शुरुआत करते हैं। हम अपने जीवन में भौतिक चीजों के बजाए आध्यात्मिक बातों को महत्व देना शुरु करते हैं। हम मूल्याधारित गुणवत्तापूर्ण जीवन के रचना की नींव डालते हैं,  जहाँ हम उदारता और प्रेम को अपने जीवन में लाने में समर्थ होते हैं। हमारे विचार स्पष्ट होते हैं और निर्णय क्षमता बढ़ती है।

यह सच्ची रिट्रीट हमें मदद करती है उस स्थान पर लौटने के ‍लिए जहाँ हम अपनी सत्यता और समझ के साथ जुड़कर सदियों पुराने प्रश्न, "मैं कौन हूँ" का उत्तर पा लेते हैं। और तब ही हम आदि और अन्त के नियम को समझ पाते हैं। जहाँ पर इस प्रश्न की समाप्ति होती हैं वहीं पर अनुभवों की शुरुआत होती है, इस सफर का आनन्द लें….