ब्रह्माकुमारीज़ की कहानी

ब्रह्माकुमारीज़ एक आध्यात्मिक विश्व विद्यालय

माउण्ट आबू, राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखला की ऊंची चोटी पर बसा हुआ पर्वतीय स्थल जो वर्ष 1950 में कराची, पाकिस्तान से स्थानान्तरित आदि संगठन को मनन चिन्तन और शान्ति का अनुभव कराने वाला एक आदर्श स्थान साबित हुआ। किराये पर लिये गये मकान में कुछ साल रहने के बाद इस संगठन ने वर्तमान स्थान पर स्थानान्तरण किया। जो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय (ब्रह्माकुमारीज़ एक ईश्वरीय विश्व विद्यालय) के नाम से स्थापित हुआ। ब्रह्माकुमारीज़ का यह मुख्यालय मधुबन के नाम से जाना जाता है।

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Spiritual Headquarters - Mount Abu

Take a magical tour to Mount Abu, India where Brahma Kumaris students have been journeying to for over 60 years for spiritual wisdom.

नम्रता पूर्वक शुरुआत

सन 1937 में सिंध हैदराबाद, पाकिस्तान के एक शहर में भारत के एक सेवानिवृत्त व्यवसायी दादा लेखराज कृपलानी के द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ की स्थापना की गई। उनका आध्यात्मिक नाम प्रजापिता ब्रह्मा रखा गया और प्यार से उन्हें ब्रह्मा बाबा के नाम से पुकारते हैं। सन 1936 में साक्षात्कारों की एक श्रृंखला को करने के बाद उनको एक स्कूल के निर्माण की प्रेरणा मिली, जिसमें राजयोग ध्यान के अभ्यास के साथ उसके लिए आवश्यक नियमों की शिक्षा दी जाने लगी। विद्यालय का वास्तविक नाम ओम् मण्डली था। जिसमें कुछ पुरुष, महिलायें और बच्चे शामिल थे, जिनमें से अधिकतर ने एक साथ एक परिवार के रूप में रहने का निर्णय लिया। 

 


भारत पाकिस्तान के विभाजन के पूर्व समाज में हो रही अत्यधिक उथल-पुथल के बावजूद यह सभी लोग एकत्रित हुए। शुरू में सिन्ध हैदराबाद में और एक साल बाद वे कराची में स्थानान्तरित हुए। कालान्तर में आत्मा, परमात्मा और समय से सम्बन्धित अत्यन्त सरल और स्पष्ट ज्ञान का ढांचा प्रत्यक्ष हुआ। सन 1950 में (विभाजन के दो साल बाद) यह संगठन इसके वर्तमान स्थान, भारत के माउण्ट आबू में स्थानान्तरित हुआ। तब तक वे लोग लगभग 400 की संख्या में एक स्वयंशासित आत्मनिर्भर संगठन के रूप में अपना समय आध्यात्मिक ज्ञान का गहरा अध्ययन, राजयोग ध्यान का अभ्यास और स्व परिवर्तन में बिताने लगे थे। 

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The Story of the Brahma Kumaris

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