प्रयोग

प्रयोग १ : परमात्मा एक प्रकाश का स्वरूप है।

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परमात्मा एक शक्ति है, एक आत्मा प्रकाश का बिन्दु – आत्मा जो कभी मनुष्यात्मा ना थी और ना ही होगी। कुछ लोगों के लिए परमात्मा, ईश्वर एक ऐसा भारी भरकम शब्द है जिसकी भयपूर्ण यादों के साथ अरुचि की झालर लगी हुई है। कुछ लोग उसकी पूजा करते हैं, और कुछ उसका नाम सिमरण करते हैं।

ब्रह्माकुमारीज़ विद्यालय के द्वारा यह सूचित किया जाता है कि परमात्मा केवल आपको उस आध्यात्मिक शक्ति के केन्द्र बिन्दु के साथ परस्पर सम्बन्ध जोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। सहज विधि के माध्यम से आपको कहा जाता है कि याद करें और उस शक्ति को आपको मार्ग दर्शन करने के लिए जगह और समय बनायें। अगर आप ऐसा चाहते हो तो, बस इतना ही। एक बार जब आप सम्बन्ध जोड़ लेते हैं तब आपको अनुभव होगा कि ऊर्जा की किरण आपकी आत्मा में प्रवेश हो रही हैं। जैसे कि किसी कुण्ड से शान्ति, प्रेम, आनन्द, साहस और सुख और इससे भी अधिक शक्तियाँ निरन्तर मेरी तरफ आ रही हैं। उस आत्मा को याद करने का कोई विवशता नहीं है। ना ही किसी प्रकार के श्राप (दण्ड) का भय रखने की आवश्यकता है। परमात्मा जो एक बिन्दु रूप शक्ति है उसकी पूजा करने की आवश्यकता नहीं है।

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प्रयोग २ : परमात्मा गुणों का एक सागर है

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परमात्मा अन्य सभी आत्माये और प्रकृति के बन्धन से स्वतन्त्र है। एक अलग और अनोखी शक्ति है। संस्कृत भाषा में इस शक्ति को आत्मा कहा जाता है। भगवान एक आत्मा है। गांधी जी को महात्मा कहा जाता था, लेकिन परमात्मा एक सम्पूर्ण महात्मा है। लेकिन अभी के लिए हम गॉड, भगवान इस नाम को अलग रखते हैं और ‘परम शक्ति' नाम का इस्तेमाल करते हैं। सद्गुण इस उन्नत शक्ति के अभिव्यक्ति का माध्यम है। सद्गुणों के स्रोत परम सत्ता से सद्गुणों का प्रवाह बहता है। इस परम सत्ता के सानिध्य में रहने से आप सद्गुणों के सागर में नहाते हो और अपने जीवन के समस्याओं के समाधान प्राप्त करते हो।

गुणों का सागर पर यह ध्यान की प्रयास करो

प्रयोग ३ : सबका भगवान एक ही है

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भगवान किसी की व्यक्तिगत मिलकियत नहीं है, भगवान एक शक्ति हैं। उस परम सत्ता को कोई एक विश्वास मत, किसी एक धर्म की मिलकियत नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह शक्ति किसी के पकड़ने के लिए, अधिकार में रखने के लिए, नियंत्रण में रखने के लिए या हांसिल करने के लिए नहीं है। वह एक अनन्त शक्ति है। कभी-कभी उस परम आत्मा को सभी आत्माओं के माता-पिता के रूप में देखा जाता है। इसका मतलब है कि सभी उस स्रोत के साथ जुड़े हुए हैं और सम्बधित हैं। जब और जहाँ आप चाहते हो उस स्रोत के साथ सम्बन्ध जोड़ने के लिए आप स्वतंत्र हो, उसके साथ संवाद के लिए कोई निश्चित नियम नहीं है – केवल एक कि खुला इच्छुक और सच्चा हृदय।

सभी को प्यार करने वाले परमात्मा,   जो हम परे ले जाता है, पर यह ध्यान की प्रयास करो

प्रयोग ४ : भगवान किसी भी लिंग से परे है

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भगवान किसी भी लिंग से परे अथवा वास्तव में पुरुष स्त्री दोनों एक ही है। इसलिए कोई सर्वनाम उस पर सटीक नहीं बैठता। उसके लिए उसका और उसकी दोनों कहा जा सकता है। लेकिन अगर आप इस आत्मा को माता या पिता के रूप में महसूस करना चाहते हो तो बिल्कुल उन सर्वनामों को अपने राजयोग ध्यान के दौरान इस्तेमाल करें, क्योंकि वे आपके विचारों से मेल खाते होंगे। उस दिव्य सत्ता के बारे के सम्बन्ध में आपका अनुभव आपकी निजी अनुभूति है।

लिंग-मुक्त सुप्रीम पर यह ध्यान की प्रयास करो